लोटस टेम्पल
भारत की राजधानी नई दिल्ली के दक्षिणी हिस्से में लोटस टेम्पल स्थित है। इस अनूठी संरचना को पहली बार देखने पर विश्वास ही नहीं होता कि यह कोई मंदिर है।

इस मंदिर की विशेषता है इसकी आधुनिक वास्तुकला और विशाल कमल के फूल वाली आकृति। सफेद संगमरमर से बनी कमल के फूल की पंखुड़ियां, चारों तरफ हरे-भरे बगीचे और पानी के 9 तालाब। यह सब मिलकर इस जगह को बेहद ही शांत और सुरम्य रूप दे देते हैं।
लोटस टेंपल की कहानी केवल इस मंदिर की खूबसूरती तक सीमित नहीं है। इसकी बनावट के पीछे भी एक ऐसी सोच है जो इसे धर्म, जाति, देश और समुदाय की सीमा से ऊपर उठकर मानवता से जोड़ती है। लोटस टेंपल असल में एक ‘बहाइ उपासना मंदिर है। यह केवल एक धर्म के अनुयायियों के लिए नहीं बनाया गया, बल्कि इसे बनाने का उद्देश्य है मानवता की एकता को दर्शाना ताकि अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग बिना किसी मूर्ति बिना किसी प्रवचन के इस शांत वातावरण में प्रार्थना कर अपने ईश से जुड़ सकें।
लोटस टेम्पल मंदिर
लोटस टेंपल का आधिकारिक नाम ‘बहाई हाउस का वर्कशिप’ अर्थात ‘बहाई उपासना मंदिर’ है। यह बहाइ धर्म के लिए एक प्रार्थना स्थल है।
लोटस टेंपल दिल्ली के दक्षिणी क्षेत्र बहापुर कालकाजी में स्थित है। इसे लोटस टेंपल इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसकी वास्तुकला एक खिले हुए कमल से प्रेरित है। इसे दूर से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है जैसे पानी के बीच सफेद रंग का कमल खिल रहा है।
बहाइ धर्म 19वीं सदी में ईरान से शुरू हुआ एक स्वतंत्र धर्म है। इस धर्म का उद्देश्य है मानवता को सर्वप्रथम रखना। बहाइ मान्यता के अनुसार दुनिया के अलग-अलग धर्म के संस्थापक जैसे कृष्ण, बुद्ध, ईसा मसीह, मोहम्मद तथा अन्य आध्यात्मिक शिक्षकों का उद्देश्य केवल एक ही है और वह है मानवता को ईश्वर की ओर ले जाना।
इस प्रार्थना स्थल के निर्माण के पीछे मन्तव्य अत्यंत स्पष्ट है कि एक ही छत के नीचे अलग-अलग धर्म के लोग आध्यात्मिक चिंतन कर सकें और मानवता तथा समाज की भलाई के बारे में मिलकर सोच सकें।
लोटस टेम्पल का अर्थ और महत्व क्या है
लोटस टेंपल का शाब्दिक अर्थ है ‘कमल मंदिर’, लेकिन यह मंदिर केवल कमल के डिजाइन तक सीमित नहीं है। इसे बनाने के लिए कमल के फूल की आकृति को चुना गया क्योंकि भारतीय संस्कृति में कमल का संबंध पवित्रता और आध्यात्मिकता से रहा है।
कमल की विशेषता होती है कि वह कीचड़ और गंदे पानी में खिलता जरूर है मगर फिर भी साफ और सुंदर दिखाई देता है। यही विचार इंसान के जीवन से जुड़ा हुआ है। कितनी भी कठिन परिस्थितियां हों इंसान को अपने अंदर की अच्छाई और शुद्धता को नहीं छोड़ना चाहिए।
दिल्ली के लोटस टेंपल को बनाने वाले वास्तुकार फरीबॉर्ज़ सहबा ने इस संरचना को बनाने से पहले भारतीय वास्तुकला का गहन अध्ययन किया। इस अध्ययन के बाद ही उन्होंने कमल के फूल की आकृति को चुना। यह आकृति पवित्रता, सरलता और ताजगी की भावना व्यक्त करती है। इसलिए कमलाकार लोटस टेंपल सिर्फ सुंदरता नहीं बल्कि शांति, पवित्रता और एकता की भावना को प्रदर्शित करता है।
लोटस टेम्पल बनाने का उद्देश्य
लोटस टेंपल के निर्माण के पीछे उद्देश्य था एक ऐसा उपासना स्थल बनाना जहां हर धर्म और हर पृष्ठभूमि का व्यक्ति आ सके।
यह बहाई धर्म का उपासना स्थल है, लेकिन बहाइ धर्म मानवता को मूल भावना मानता है। यह स्थान किसी भी जाति, धर्म, राष्ट्रीयता या सामाजिक पहचान से ऊपर उठकर केवल आध्यात्मिक शांति का अनुभव देता है।
यही वजह है कि लोटस टेंपल में किसी भी पारंपरिक मंदिर की तरह कोई मूर्ति, कोई वेदी या कोई धार्मिक चित्र नहीं दिखाई देता। यहां ना कोई पुजारी है और ना ही कोई धर्मगुरु। यहां आयोजित होने वाली प्रार्थना सेवाओं में अलग-अलग धर्म ग्रंथो से प्रार्थनाओं के संदर्भ लिए जाते हैं और उनका पाठ किया जाता है।
लोटस टेम्पल का इतिहास
लोटस टेंपल से जुड़े आधिकारिक इतिहास के अनुसार मंदिर के निर्माण हेतु जमीन वर्ष 1953 में खरीदी गई थी। परन्तु विभिन्न कारणों की वजह से इस परियोजना का सपना साकार करने में काफी समय लग गया।
काफी मेहनत और विपरीत परिस्थितियों के बाद मंदिर का निर्माण आखिरकार वर्ष 1980 में शुरू हुआ। 6 वर्षों की अथाह मेहनत के बाद वर्ष 1986 में इसका निर्माण पूरा हुआ। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार दिसंबर 1986 में लोटस टेंपल का सार्वजनिक उद्घाटन किया गया।
लोटस टेम्पल के वास्तुकार का सम्पूर्ण विवरण
लोटस टेंपल के वास्तुकार ईरानी मूल के फरीबॉर्ज़ सहबा थे, जो बाद में कनाडा शिफ्ट हो गए। जब उनके सामने एक उपासना गृह तैयार करने का प्रस्ताव आया तब उन्होंने सबसे पहले भारत की संस्कृति और यहां के आध्यात्मिक मूल्यों पर विस्तार से जानने का काम आरंभ किया।
उन्होंने भारत के विभिन्न हिस्सों की वास्तु कला और धार्मिक प्रतीकों का अध्ययन किया और अंततः कमल की आकृति का चयन किया।
लोटस टेम्पल : वास्तुकला का बेजोड़ नमूना
लोटस टेंपल की लोकप्रियता का सबसे महत्वपूर्ण कारण है इसकी वास्तुकला। यह टेंपल पारंपरिक धार्मिक भवन की तरह बिल्कुल नहीं दिखाई देता बल्कि इसका ढांचा इस प्रकार प्रतीत होता है जैसे एक विशाल कमल तालाब के बीचों-बीच खड़ा हो।
इस सफेद रंग के विशाल कमल में संगमरमर से बनी 27 पंखुड़ियां तैयार की गई हैं। इन 27 पंखुड़ियां को तीन अलग-अलग समूह में बांटा गया है और हर समूह में नौ पंखुड़ियां आती है।
सबसे खास बात यह है की यह पंखुड़ियां जिस संगमरमर से बनाई गई हैं वह संगमरमर ग्रीस से लाया गया था। इस संगमरमर की कटाई इटली में की गई। इस पूरे ढांचे को बनाने के लिए 10,000 sq mt संगमरमर की आवश्यकता पड़ी थी। यह केवल एक बेजोड़ वास्तु कला ही नहीं दर्शाता बल्कि जटिल इंजीनियरिंग का जीता-जागता उदाहरण भी है।
लोटस टेंपल के निर्माण में दुनिया के जाने-माने कंस्ट्रक्शन ग्रुप लार्सन ऐंड टुब्रो (L&T) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अनूठे उपासना गृह को तैयार करने में लंदन की फ्लिंट और नील पार्टनरशिप इंजीनियरिंग कंपनी एक विशेषज्ञ के रूप में जुड़ी। इन सभी की मेहनत और देखरेख का ही परिणाम है कि दिसंबर 2026 में लोटस टेम्पल अपने निर्माण के 50 वर्ष पूरे करने वाला है पर आज भी उसकी चमक-दमक जस की तस बनी हुई है।
लोटस टेंपल का सम्पूर्ण परिसर 26.5 एकड़ में फैला है। मुख्य भवन के अलावा यहाँ लाइब्रेरी, एडमिनिस्ट्रेटिव क्षेत्र, इनफॉरमेशन सेंटर और एजुकेशन सेंटर भी बनाए गए हैं।
सफेद संगमरमर के कमल की 27 पंखुड़ियों का अद्भुत विभाजन
लोटस टेंपल को सफेद संगमरमर से बनाया गया है। इस कमल की 27 पंखुड़ियां इस तरह से निर्मित की गई हैं कि 3 अलग अलग परतें बन जाती हैं। हर परत में 9 पंखुड़ियां। पंखुड़ियों के बाहर, मध्य और बीच का संयोजन इस प्रकार है
पहला समूह : पहले समूह की 9 पंखुड़ियां बाहर की ओर खुलता है। यह ‘एंट्रेंस लीव्स’ अर्थात प्रवेश पंखुड़ियां कहलाती हैं। इन 9 प्रवेश पंखुड़ियों में 9 प्रवेश द्वार बने हैं।
दूसरा समूह : दूसरे समूह की पंखुड़ियां अंदर की ओर झुकी हुई हैं। यह प्रवेश पंखुड़ियां प्रवेश और प्रार्थना कक्ष की पंखुड़ियां के बीचो-बीच निर्मित हैं जो प्रार्थना हॉल को ढंकने वाली संरचना का एक हिस्सा हैं।
तीसरा समूह : तीसरे समूह की 9 पंखुड़ियां एक बंद कमल का आकार बनाती हैं और यही प्रार्थना कक्ष को पूर्णतः ढंकने का काम करती हैं। इन्हीं भीतरी 9 पंखुड़ियों के बीच भीतर का मुख्य प्रार्थना कक्ष है।
लोटस टेम्पल और 9 अंक का अनूठा सम्बंध
लोटस टेम्पल की वास्तु कला में 9 अंक का उपयोग बार-बार किया गया है। इसमें 9 प्रवेश द्वार हैं। 9-9-9 पंक्तियों के 3 समूह हैं। भवन के चारों ओर 9 जल कुंड बनाए गए हैं। बहाइ वास्तु कला में 9 अंक खुलेपन का संकेत होता है। वहीं भारतीय संस्कृति में भी 9 अंक आध्यात्मिकता और धार्मिक प्रतीक माना जाता है। भवन के चारों ओर बने 9 तालाब लोटस टेंपल की संरचना को एक ओर सुंदर बनाते हैं वही यह दूसरी ओर भवन को प्राकृतिक रूप से ठंडा और हवा के आवागमन में मदद करते हैं।
लोटस टेम्पल का प्रार्थना कक्ष और पूजा नियम
लोटस टेंपल एक प्रार्थना भवन जरूर है, लेकिन इसके मुख्य प्रार्थना कक्ष में कोई मूर्ति, कोई वेदी और कोई भी धार्मिक प्रतीक नहीं है। यह एकदम शांत और सरल स्थान है। यहां आने वाला व्यक्ति बिना किसी बाहरी प्रतीक के केवल मन के माध्यम से ईश्वर से जुड़ सकता है।
लोटस टेंपल की प्रार्थना व्यवस्था पारंपरिक मंदिरों से अत्यधिक भिन्न है। यहां सभी धर्मों के पवित्र ग्रन्थों का पाठ किया जाता है। आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार यहां प्रार्थना सेवाएं दिन में चार बार आयोजित की जाती हैं।
प्रत्येक प्रार्थना सेवा 10 से 15 मिनट की होती है। इस दौरान प्रार्थना कक्ष में शांत वातावरण रखा जाता है।
लोटस टेम्पल : प्रार्थना सेवाओं का समय
- सुबह 10:00 बजे
- दोपहर 12:00 बजे
- दोपहर 3:00 बजे
- शाम 5:00 बजे
लोटस टेम्पल का प्रार्थना कक्ष कैसा है?
लोटस टेंपल का प्रार्थना कक्ष भवन का सबसे शांत हिस्सा है। यहां अंदर बैठने की व्यवस्था है। आने वाले लोग नियम का पालन करते हुए यहां शांति से बैठ सकते हैं। इस मंदिर में एक बार में 1300 लोग एक साथ बैठ सकते हैं। प्रार्थना कक्ष का ऊपरी डिजाइन इस तरह से बनाया गया है की पंखुड़ियां के बीच से आने वाली सूरज की रोशनी अंदर तक फैल सके और कक्ष में बाहर की हवा अंदर आ सके। इसीलिए पंखुड़ियां के बीच निर्मित प्रार्थना हॉल में अलग-अलग समय पर वातावरण बदलता हुआ महसूस होता है।
लोटस टेम्पल में प्रमुख आकर्षण
अक्सर पर्यटक लोटस टेम्पल में मुख्य भवन देखकर तुरंत वापस लौट आते हैं। परन्तु यहां के परिसर में प्रार्थना कक्ष के इतर भी कुछ अन्य जगह ऐसी हैं जिन्हें अपनी यात्रा में जोड़ना फायदेमंद साबित हो सकता है। ऐसे में पर्यटकों को मुख्य भवन के अलावा इन जगहों को भी शामिल करना चाहिए:
- मुख्य कमल आकृति का भवन
- 9 जल कुंड
- मुख्य भवन के आसपास बने बगीचे
- प्रार्थना कक्ष इनफॉरमेशन सेंटर
- पूल साइड एग्जिबिशन सेंटर (यहां बहाइ विचार और सामाजिक आर्थिक विकास से जुड़ी जानकारी पर्दशिय की जाती है।)
- परिसर की वास्तुकला के साथ चलने वाला रमणीय रास्ता (यहां परिसर के चारो तरफ पैदल चलकर सुंदर कमल की आकृति का बाह्य रूप देखा जा सकता है।)
- सांस्कृतिक और संगीत कार्यक्रम (उपलब्ध होने पर)
- लाइब्रेरी 111 भाषा में 2000 से अधिक किताबें मौजूद
लोटस टेम्पल को मिले सम्मान और पुरस्कार
लोटस टेम्पल आधुनिक वास्तुकला का जीता जाता उदाहरण है। इस अनूठी संरचना को निर्माण और वास्तुकला क्षेत्र में कई बार अंतर्राष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं।
वर्ष 1988 में इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग UK की ओर से लोटस टेम्पल को स्ट्रक्चरल डिजाइन के लिए सम्मान दिया गया।
वर्ष 1988 में ही आउटडोर इल्यूमिनेशन के लिए लोटस टेम्पल को अंतरराष्ट्रीय रूप से सम्मानित किया गया।
अमेरिकन कंक्रीट इंस्टीट्यूट ने भी लोटस टेम्पल को अनूठी वास्तुकला हेतु सम्मान दिया है।
2011 में लोटस टेंपल की 25वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम में भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे. अब्दुल कलाम ने भी इस परिसर को एकता, आध्यात्मिकता, सद्भाव और खुशी से जोड़ने वाले स्थान के रूप में सराहा था।
लोटस टेम्पल में आयोजित कार्यक्रम
लोटस टेम्पल परिसर में एक इनफॉरमेशन सेंटर बनाया गया है। यहां बहाई धर्म और उससे जुड़ी विचारधारा के बारे में बताया जाता है। यहां फोटो पैनल, लिखित सामग्री और फिल्में उपलब्ध कराई जाती हैं। ऐसे जिज्ञासु पर्यटक जो अपनी यात्रा को जानकारी से भरपूर बनाना चाहते हैं उन्हें लोटस टेम्पल परिसर में बने इनफॉरमेशन सेंटर में अवश्य जाना चाहिए।
आमतौर पर इस परिसर में कला और संगीत से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य मनोरंजन नहीं होता बल्कि लोगों को कला के माध्यम से जोड़ना होता है। हालांकि लोटस टेम्पल में किसी प्रकार का ‘म्यूज़िक/लाइट शो’ या कोई ‘लेजर शो’ नहीं होता
मंदिर परिसर में पर्यावरण का ध्यान कैसे रखा जाता है?
लोटस टेंपल केवल एक खूबसूरत इमारत नहीं है। यहां पर्यावरण से जुड़े कई प्रयास भी किए गए हैं। मंदिर के बगीचों और लॉन में रीसायकल वाटर का इस्तेमाल किया जाता है।
परिसर में रेनवाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था विकसित की गई है।
इस परिसर में वेस्ट वाटर के ट्रीटमेंट हेतु सीवेज ट्रीटमेंट फैसिलिटी भी बनाई गई है।
यही मौजूद गार्डन में से जितना कचरा इकट्ठा होता है उसी से कंपोस्ट तैयार किया जाता है और यह कंपोस्ट गार्डन की हरियाली को बनाए रखने के लिए उपयोग में लाया जाता है।
मंदिर परिसर में सोलर पैनल लगाए गए हैं जिससे बिजली के खर्चे में 45% की कमी आई है।
मंदिर का डिजाइन आधुनिक वास्तुकला का उच्चतम रूप है इसीलिए दिल्ली जैसे शहर में 45 डिग्री सेल्सियस तापमान होते हुए भी भवन का वेंटिलेशन और कूलिंग सिस्टम मंदिर के अंदर ठंडक बरकरार रखता है।
लोटस टेम्पल के आसपास घूमने की जगह
लोटस टेम्पल दिल्ली के दक्षिणी इलाके में है और यहां लोटस टेम्पल के साथ घूमने के कई अन्य पर्यटन स्थल मौजूद हैं। ऐसे में वह पर्यटक जो लोटस टेम्पल तक आ रहे हैं वह एक दिन की यात्रा योजना बनाकर लोटस टेंपल के साथ अन्य जगह भी घूम सकते हैं।
कालकाजी मंदिर : यह लोटस टेंपल के पास स्थित हिंदू मंदिर है जो देवी कालका को समर्पित है।
इस्कॉन टेंपल : लोटस टेंपल के ही नजदीक कृष्ण भक्ति को समर्पित हिंदू धार्मिक स्थल इस्कॉन टेंपल भी निर्मित है।
नेहरू प्लेस : दिल्ली का प्रसिद्ध कमर्शियल और टेक्नोलॉजी मार्केट एरिया नेहरू प्लेस भी लोटस टेंपल के काफी नजदीक है।
आस्था कुंज पार्क : नेहरू प्लेस, इस्कॉन मंदिर और लोटस टेम्पल के बीच आस्था कुंज पार्क 200 एकड़ में फैला हुआ विशाल पार्क है। यहां आराम से परिवार के साथ शाम का समय बिताया जा सकता है।
अन्य स्थल : इसके अलावा बाहर से आने वाले पर्यटक अपनी सुविधा अनुसार हुमायूं का मकबरा, इंडिया गेट, कुतुब मीनार जैसे अन्य पर्यटन स्थल भी शामिल कर सकते हैं।
लोटस टेम्पल से जुड़े रोचक तथ्य
• लोटस टेम्पल कोई हिंदू मंदिर नहीं है बल्कि यह एक बहाइ धर्म का प्रार्थना गृह है।
• लोटस टेम्पल में कमल का आकार केवल सजावट के लिए नहीं बल्कि एक फूल की संरचना से प्रेरित होकर बनाया है।

• इस कमल में कुल 27 पंक्तियां हैं जिनको तीन अलग-अलग समूह में बांटा गया है।
• लोटस टेंपल परिसर के अंदर 9 तालाब हैं जो खूबसूरती बढाने के साथ परिसर की ठंडक बरकरार रखते हैं।
• लोटस टेम्पल में कोई मूर्ति, कोई पुजारी, कोई धर्मग्रंथ नही है।
• इस भवन का निर्माण करने हेतु संगमरमर ग्रीस से मंगाया गया था और इसे इटली में आवश्यकता अनुसार काटा गया था।
• इस मंदिर को बनाने में कुल 6 साल लगे हैं।
• लोटस टेम्पल की आकृति प्रकृति और आध्यात्मिकता से प्रेरित है।
• लोटस टेम्पल में एक बार में 1300 लोग एक साथ बैठ सकते हैं।
लोटस टेम्पल को साइलेंट टीचर क्यों कहा जाता है ?
लोटस टेम्पल को अक्सर साइलेंट टीचर नाम से पुकारा जाता है। लोटस टेम्पल की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि इस मंदिर में कोई मूर्ति और कोई धार्मिक प्रतीक नहीं है। यहां ऊंची आवाज में प्रवचन भी नहीं होता। परंतु फिर भी यहां आने वाला हर यात्री खुद को आध्यात्मिकता से जोड़ लेता है।
लोटस टेंपल की संरचना इस प्रकार बनाई गई है की प्रार्थना भवन में आकर बैठने वाला व्यक्ति अपने आप शांत हो जाता है। उसके अंदर एकता और सरलता जैसे भाव उत्पन्न होने लगते हैं।
बहाइ विचारधारा पर बना यह मंदिर अपनी सुंदरता और सरल वातावरण की वजह से भटके हुए मन को भी शांत करने में सफल होता है। इसी वजह से लोटस टेंपल को केवल सुंदर ही नहीं बल्कि इस साइलेंट टीचर नाम से बुलाया जाता है।
लोटस टेम्पल जाते समय किन बातों का ध्यान रखें?
लोटस टेंपल जाने से पहले कुछ विशेष नियमों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है:
° यहां प्रार्थना कक्ष में शांति बनाए रखें।
° अपने मोबाइल को साइलेंट मोड पर रखें।
° प्रार्थना कक्ष में जुते-चप्पल पहन कर जाने की अनुमति नहीं है।
° यह एक उपासना गृह है इसीलिए यहां सभ्य कपड़े पहन कर जाएं।
° मंदिर परिसर में खाने-पीने पर प्रतिबंध है।
° मंदिर परिसर में बैग/ भारी सामान भूल कर भी ना ले जाएं।
° मुख्य प्रार्थना कक्ष और इनफॉरमेशन सेंटर के अंदर फोटोग्राफी ना करें।
° प्रोफेशनल फोटोग्राफी के लिए वेबसाइट पर जाकर पहले से ही अनुमति लें।
° ग्रुप विज़िट करने के लिए वेबसाइट पर जाकर ग्रुप विजिट अनुमति लें।
° यह परिसर धुआं मुक्त परिसर है इसीलिए यहां भूल कर भी सिगरेटस स्मोकिंग ना करें।
° मंदिर परिसर व्हीलचेयर फ्रेंडली है, जरूरत पड़ने पर व्हीलचेयर उपलब्ध करवाई जाती है।
लोटस टेम्पल एंट्री टिकट और समय सारणी
लोटस टेंपल में सामान्यतः प्रवेश के लिए किसी प्रकार का कोई शुल्क नहीं लिया जाता। यहां घूमने के लिए टिकट खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि मंदिर में प्रवेश हेतु विशेष नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।
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जानकारी |
विवरण |
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खुलने का दिन |
मंगलवार से रविवार |
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समय |
सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक |
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बन्द |
हर सोमवार |
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प्रार्थना सेवा |
10AM, 12PM, 3PM, 5PM |
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प्रार्थना अवधि |
लगभग 10-15 मिनट |
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प्रवेश शुल्क |
निशुल्क |
(अधिक भीड़, तेज बारिश या खराब मौसम जैसी स्थिति में प्रार्थना कक्ष अस्थायी रूप से बंद भी किया जाता है)
निष्कर्ष
लोटस टेम्पल दिल्ली का केवल एक पर्यटन स्थल नहीं है। इसकी खूबसूरती तीन अलग-अलग स्तर पर दिखाई देती है: वास्तु कला, आध्यात्मिकता और मानवता का संदेश। एक ओर जहां सफेद संगमरमर की 27 पंखुड़ियां इस जगह को आर्किटेक्चर का अद्भुत स्थल बनाती हैं तो वही शांत प्रार्थना कक्ष लोगों को स्वयं से जुड़ने का मौका देता है।
सबसे खास बात यह है कि यह जगह किसी भी एक धर्म और समुदाय से नहीं जुड़ी है। इसीलिए यहां आने वाला व्यक्ति इस स्थल को अपने तरीके से अनुभव कर सकता है। यह जगह किसी के लिए मेडिटेशन स्थल हो सकती है, तो किसी के लिए स्वयं से जुड़ने का स्थान। कोई पर्यटक भीड़भाड़ से बचकर कुछ समय की शांति पाने आता है तो कोई पर्यटक यहां धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता समझने आता है।
लोटस टेम्पल का एक ही मूल विचार है, “ईश्वर एक है, मानवता एक है और सभी धर्म का मूल उद्देश्य इंसान को बेहतर बनाना और समाज में शांति स्थापित करना है।”
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