माउंट एवरेस्ट पर्वत
माउंट एवरेस्ट पर्वत दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी है जिसकी ऊंचाई समुद्री तल से 8,848,86 मीटर (29,031,69 फीट ) है नेपाल और चीन (तिब्बत) सीमा बॉर्डर पर स्थित है

माउंट एवरेस्ट पर्वत
माउंट एवरेस्ट दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी है जिसकी ऊंचाई समुद्री तल से 8,848,86 मीटर है यानी 8,85 किलोमीटर ( 29,031,7 फीट )
29 मई 1953 को न्यूज़ीलैंड के पर्वतारोही एडमंड हिलेरी और नेपाली-शेरपा पर्वतारोही तेनजिंग नोर्गे ने पहली बार माउंट एवरेस्ट की चोटी पर सफलतापूर्वक पहुँचकर इतिहास रचा था।वे माउंट एवरेस्ट के शिखर पर पहुँचने वाले विश्व के पहले पुष्ट पर्वतारोही बने।
माउंट एवरेस्ट दुनिया के सबसे खतरनाक पर्वतों में से एक है। यहाँ ऑक्सीजन की अत्यधिक कमी, बेहद कम तापमान, तेज़ बर्फीले तूफ़ान, हिमस्खलन और कठिन पर्वतीय परिस्थितियाँ इसे अत्यंत जोखिमपूर्ण बनाती हैं।
माउंट एवरेस्ट पर्वत ” मई ” जून ” जुलाई गर्मी के महीने में ऊपर करीब – 19°C से – 40°C तक टेंपरेचर रहता है वही नीचे माउंट एवरेस्ट बेस कैंप पर करीब – 4°C से – 8°C रहता है
माउंट एवरेस्ट पर दिसंबर और जनवरी के महीने में टेंपरेचर अधिक गिर जाता है इन दोनों महीने में टेंपरेचर करीब माउंट एवरेस्ट के ऊपर – 36°C से – 60°C के बीच रहता है और वही माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप नीचे – 10°C से – 35°C के बीच रहता है
माउंट एवरेस्ट पर्वत की चोटी पर चढ़ने के लिए कई लोगों ने प्रयास किया था और कुछ लोग माउंट एवरेस्ट के शिखर तक बेहद करीब पहुंचे थे लेकिन शिखर तक ना चढ़ सके।
माउंट एवरेस्ट पर्वत की ऊंचाई किनसे मापी जाती है
त्रिकोणमिती द्वारा : सबसे पहले पुराने समय में सर्वेक्षिक पर्वत से कुछ दूरी पर खड़े होकर थियोडोलाइट नामक उपकरण से पर्वत की चोटी तक का कोण मापते थे फिर दूरी और कोण के आधार पर गणित सूत्रों से ऊंचाई निकल जाती थी।
उपग्रह और रडार : पृथ्वी के चक्कर लगाने वाले उपग्रह लेजर” रडार और अन्य सेंसरों की सहायता से पर्वतों की ऊंचाई का सटीक डेटा समेकित कर लिया जाता है
जीपीएस : आज पर्वत की चोटी पर जीपीएस उपकरण रखकर समुद्री तल से उसकी सटीक ऊंचाई मापी जाती है
लेज़र स्कैनिंग : कुछ मामलों में विमान और ड्रोन से लेजर किरणें पर्वत पर भेजकर सटीक मानचित्र तैयार किया जाता है
माउंट एवरेस्ट के आसपास हिमालय की कई प्रसिद्ध प्राकृतिक और संरक्षित जगहें स्थित हैं। एवरेस्ट के दक्षिणी भाग में नेपाल का सगरमाथा राष्ट्रीय उद्यान है, जबकि उत्तरी भाग में चीन (तिब्बत) का क़ोमोलंगमा राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षित क्षेत्र स्थित है। एवरेस्ट के निकट विश्व प्रसिद्ध गोक्यो झीलें, इम्जा झील और गोरकशेप झील जैसी हिमनदीय झीलें भी हैं। इसके अलावा खुम्बू हिमनद, काला पत्थर, एवरेस्ट बेस कैंप, तथा ल्होत्से, नुप्त्से, मकालू और चो ओयू जैसी ऊँची हिमालयी चोटियाँ भी इसी क्षेत्र में स्थित हैं, जो इसे दुनिया के सबसे प्रसिद्ध पर्वतीय क्षेत्रों में से एक बनाती हैं।
माउंट एवरेस्ट पर्वत से दक्षिण – पूर्व की ओर देखने पर करीब 19 – 20 किलोमीटर दूर मकालू एक पर्वत है जिसकी ऊंचाई 8485 मीटर है दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी पर्वत चोटी है
माउंट एवरेस्ट पर्वत पर 340 से अधिक लोगों की मृत्यु हो चुकी है अभी भी 200 से ज्यादा लोगों के शव माउंट एवरेस्ट पर्वत पर मौजूद है

माउंट एवरेस्ट पर 8000 मीटर के ऊपर डेथ जोन शुरू हो जाता है जहाँ पर शरीर को समुद्री तल की तुलना में लगभग 33% [एक तिहाई] ही ऑक्सीजन उपलब्ध हो पाती है
डेथ ज़ोन लगभग 8,000 मीटर की ऊँचाई से शुरू होता है। इसी क्षेत्र में पर्वतारोहियों को ऑक्सीजन की अत्यधिक कमी और सबसे कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
एवरेस्ट अभियान को पूरा करने में सामान्यतः 6 से 9 सप्ताह (लगभग 40 से 60 दिन) का समय लगता है। इस अवधि में पर्वतारोहियों को बेस कैंप में रहकर ऊँचाई के अनुसार अपने शरीर को ढालने (एक्लिमेटाइजेशन), कई बार ऊँचे कैंपों तक जाकर वापस आने, मौसम के अनुकूल होने और सही समय का इंतजार करने में काफी समय लगता है। मौसम अनुकूल होने पर अंतिम शिखर (समिट पुश) की शुरुआत की जाती है, जिसमें बेस कैंप से शिखर तक पहुँचने और वापस लौटने में आमतौर पर 5 से 7 दिन लगते हैं। हालांकि, खराब मौसम, तेज़ हवाओं या अन्य परिस्थितियों के कारण पूरा अभियान इससे अधिक समय भी ले सकता है।
माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पर्वतारोही कितनी देर रुक सकते हैं?
माउंट एवरेस्ट पर्वत की चोटी पर ऑक्सीजन की मात्रा बेहद कम होती है और मौसम कुछ ही मिनटों में खतरनाक हो सकता है। इसलिए अधिकांश पर्वतारोही शिखर पर लगभग 10 से 20 मिनट ही रुकते हैं। इस दौरान वे तस्वीरें लेते हैं, झंडा फहराते हैं, आसपास का दृश्य देखते हैं और फिर तुरंत नीचे उतरना शुरू कर देते हैं। विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि शिखर पर आवश्यकता से अधिक देर रुकना सुरक्षित नहीं होता, क्योंकि वहाँ हर अतिरिक्त मिनट जान का जोखिम बढ़ा सकता है।
माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के नियम: अनुमति, आयु सीमा और मेडिकल जांच
माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना केवल शारीरिक ताकत का ही नहीं, बल्कि कानूनी अनुमति, अच्छे स्वास्थ्य और उचित तैयारी का भी विषय है। यदि आप माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको उस देश से पर्वतारोहण परमिट (क्लाइम्बिंग परमिट) प्राप्त करना होगा, जिस ओर से आप चढ़ाई करना चाहते हैं। दक्षिणी मार्ग (साउथ कोल रूट) से चढ़ाई के लिए नेपाल सरकार और उत्तरी मार्ग (नॉर्थ रिज रूट) से चढ़ाई के लिए चीन (तिब्बत) प्रशासन की अनुमति आवश्यक होती है। बिना आधिकारिक परमिट के माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना प्रतिबंधित है।
अधिकांश पर्वतारोही स्वयं परमिट की प्रक्रिया पूरी नहीं करते, बल्कि किसी मान्यता प्राप्त पर्वतारोहण एजेंसी (एक्सपेडिशन एजेंसी) के माध्यम से अभियान में शामिल होते हैं। यह एजेंसी आवश्यक शुल्क लेकर परमिट, बेस कैंप की व्यवस्था, भोजन, ऑक्सीजन सिलेंडर, रस्सियाँ, उपकरण, रहने की व्यवस्था, संचार सुविधा और अन्य जरूरी सेवाएँ उपलब्ध कराती है। अभियान के दौरान आपके साथ अनुभवी गाइड (शेरपा) और प्रशिक्षित पर्वतारोही भी रहते हैं, जो कठिन परिस्थितियों में आपकी सहायता करते हैं और पूरी चढ़ाई को अधिक सुरक्षित बनाने का प्रयास करते हैं।
माउंट एवरेस्ट पर्वत पर चढ़ने के लिए आयु सीमा भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। नेपाल के वर्तमान नियमों के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु के लोगों को एवरेस्ट पर चढ़ने की अनुमति नहीं दी जाती। वहीं 70 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए नेपाल सरकार की ओर से कोई आधिकारिक अधिकतम आयु सीमा निर्धारित नहीं है, लेकिन कई अभियान एजेंसियाँ सुरक्षा कारणों से अपनी अलग आयु या स्वास्थ्य संबंधी शर्तें लागू कर सकती हैं। इसलिए वरिष्ठ पर्वतारोहियों को पहले संबंधित एजेंसी के नियमों की जानकारी लेना आवश्यक होता है।
अभियान शुरू होने से पहले पर्वतारोहियों का विस्तृत मेडिकल परीक्षण (मेडिकल चेक-अप) भी किया जाता है। यदि किसी व्यक्ति को गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो, तो उसे एवरेस्ट अभियान के लिए अयोग्य माना जा सकता है। विशेष रूप से गंभीर हृदय रोग (हार्ट डिज़ीज़), अनियंत्रित उच्च रक्तचाप (अनकंट्रोल्ड हाई ब्लड प्रेशर), गंभीर अस्थमा या फेफड़ों की बीमारी, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), गंभीर मिर्गी (एपिलेप्सी), गुर्दे या यकृत (लिवर) की गंभीर बीमारी, या ऐसी अन्य गंभीर चिकित्सीय स्थितियाँ जिनसे ऊँचाई पर जान का खतरा बढ़ सकता हो, अभियान में भाग लेने में बाधा बन सकती हैं। अंतिम निर्णय मेडिकल रिपोर्ट, डॉक्टर की सलाह और अभियान आयोजकों के सुरक्षा मानकों के आधार पर लिया जाता है।
एवरेस्ट पर चढ़ाई से पहले शारीरिक फिटनेस, ऊँचाई पर चढ़ने का अनुभव, मानसिक तैयारी और चिकित्सकीय रूप से पूरी तरह स्वस्थ होना अत्यंत आवश्यक माना जाता है, क्योंकि दुनिया की सबसे ऊँची चोटी पर मौसम, ऑक्सीजन की कमी और कठिन परिस्थितियाँ किसी भी समय जानलेवा साबित हो सकती हैं।
निष्कर्ष :- माउंट एवरेस्ट केवल दुनिया का सबसे ऊँचा पर्वत ही नहीं, बल्कि साहस, धैर्य और मानवीय संकल्प का जीवंत प्रतीक भी है। इसकी 8,848.86 मीटर की ऊँचाई, कठिन जलवायु और चुनौतीपूर्ण मार्ग इसे पर्वतारोहियों के लिए अंतिम परीक्षा बनाते हैं। हर वर्ष हजारों लोग इसे देखने या इसकी चोटी तक पहुँचने का सपना लेकर आते हैं, लेकिन केवल वही सफल हो पाते हैं जो पूरी तैयारी, अनुभव और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ इस चुनौती का सामना करते हैं। साथ ही, एवरेस्ट के प्राकृतिक पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करना भी हमारी साझा जिम्मेदारी है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस अद्भुत पर्वत की भव्यता और महिमा का अनुभव कर सकें।