सबसे पहले माउंट एवरेस्ट पर्वत चोटी पर चढ़ने वाला इंसान First Everest Climber
दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी माउंट एवरेस्ट की है जिसकी ऊंचाई करीब 8,848 मीटर है नेपाल और चीन ( तिब्बत ) सीमा ( बॉडर ) पर स्थित है अब तक कई देशों के 7,500 लोग माउंट एवरेस्ट पर्वत की चोटी पर चढ़ चुके हैं कई लोग दुबारा भी चढ़ है इसलिए संख्या करीब 13500 है
सबसे पहले माउंट एवरेस्ट पर्वत की चोटी पर चढ़ने वाले व्यक्ति कौन थे
माउंट एवरेस्ट
हम सभी जानते हैं माउंट एवरेस्ट दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी है जिसकी ऊंचाई समुद्री तल से 8,848,86 मीटर है यानी 8,85 किलोमीटर
माउंट एवरेस्ट पर्वत ” मई ” जून ” जुलाई गर्मी के महीने में ऊपर करीब – 19°C से – 40°C तक टेंपरेचर रहता है वही नीचे माउंट एवरेस्ट बेस कैंप पर करीब – 4°C से – 8°C रहता है
माउंट एवरेस्ट पर दिसंबर और जनवरी के महीने में टेंपरेचर अधिक गिर जाता है इन दोनों महीने में टेंपरेचर करीब माउंट एवरेस्ट के ऊपर – 36°C से – 60°C के बीच रहता है और वही माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप नीचे – 10°C से – 35°C के बीच रहता है
माउंट एवरेस्ट पर्वत की चोटी पर चढ़ने के लिए कई लोगों ने प्रयास किया था और कुछ लोग माउंट एवरेस्ट के शिखर तक बेहद करीब पहुंचे थे लेकिन शिखर तक ना चढ़ सके।
माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाले पहले व्यक्ति
सबसे पहले माउंट एवरेस्ट पर्वत की चोटी पर चढ़ने वाले कोई एक व्यक्ति नहीं बल्कि दो व्यक्ति है जिनका नाम है
- एडमंड हिलेरी
- तेनजिंग नोर्गे
यह दोनों एक साथ माउंट एवरेस्ट पर्वत की चोटी पर चढ़े थे 29 मई सन् 1953 सुबह 11:30 मिनट पर पर्वत की चोटी पर प्रथम चढ़ कर इतिहास रचा था।
एडमंड हिलेरी न्यूजीलैंड के रहने वाले व्यक्ति थे और तेनजिंग नोर्गे नेपाल के रहने वाले थे एडमंड हिलेरी दो बार माउंट एवरेस्ट पर्वत की चोटी पर चढ़ने की कोशिश करी थी। किंतु वह असफल रहे थे।
तेनजिंग नोर्गे पहाड़ों पर चढ़ने में बेहद एक्सपर्ट थे इन्होंने भी कई बार माउंट एवरेस्ट पर्वत की चोटी पर चढ़ने के लिए प्रयास करा था लेकिन यह भी असफल रहे।
सन् 1953 में कई लोगों का एक ग्रुप माउंट एवरेस्ट पर्वत की चोटी पर चढ़ने के लिए तैयार होता है जिसमें एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे शामिल रहे। जिसके लीडर जॉन हंट थे
- 13 मुख्य पर्वतारोही
- 2 डॉक्टर
- 21 से अधिक शेरपा
- 350 से अधिक पोर्टर ( सामान ढोने वाले )
इस ग्रुप में शामिल थे सबसे पहले जॉन हंट दो लोगों को भेजते है इवांस और बोर्डिलॉन दोनों माउंट एवरेस्ट पर्वत की चोटी पर चढ़ने के लिए रवाना होते है लेकिन रास्ते में इवांस के ऑक्सीजन बैग में गड़बड़ी हो जाती है जिसके कारण दोनों को वापस आना पड़ जाता है
उसके बाद जॉन हंट ने एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे को भेजा। दोनों व्यक्ति रवाना हुए इनको तीन दिन का समय लगा माउंट एवरेस्ट पर्वत की चोटी पर पहुंचने में सुबह 11:30 मिनट पर इन्होंने विजेता हासिल करी। 29 मई सन् 1953
उस समय एडमंड हिलेरी की उम्र 34 साल थी और तेनजिंग नोर्गे की उम्र 39 साल थी।
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उसके बाद एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे को देश और लोगों के प्रति अत्यधिक सम्मान मिला।
एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे का इंटरव्यू ;
हमारे आखिरी कुछ क्षणों में हम पहाड़ी की चोटी के साथ-साथ चल रहे थे और हमें शिखर दिखाई नहीं दे रहा था क्योंकि पहाड़ी की छोटी हमसे दाएं और दूर होती जा रही थी और हम आखिरी बाधा को पार कर गए और फिर हमें उत्तर की ओर ढलान पर उतरती हुई पर्वत श्रृंखला को देखकर बड़ी राहत मिली तो हमने ऊपर देखा और शिखर हमसे महज 30 – 40 फीट ऊपर था इसलिए हम चोटी की ओर चढ़ गए और उस पर पैर रख दिया इस बात की राहत मिली कि हमने शिखर को ढूंढ लिया था।
इंटरव्यू में पूछा गया आप वहां पर कितनी देर तक रुके थे आप क्या-क्या देख सकते थे:
हम वहां पर 15 मिनट तक रुके थे नजारा बेहद खूबसूरत था आसमान में बिल्कुल भी बादल नहीं थे हम पीछे की और दूर तक नेपाल देख सकते थे और मकालू जो कि एक और बहुत बड़ी पर्वत चोटी है हमको दिखाई दे रही थी।
एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे
सन् 1953 में एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे mount Everest पर्वत चोटी पर प्रथम चढ़कर इतिहास रचा था उसी साल एडमंड हिलेरी को ( सर ) नाइट बैचलर अवॉर्ड “यूनाइटेड किंगडम द्वारा सम्मानित किया गया। जिस भी व्यक्ति को यह अवॉर्ड मिलता है उसके नाम के आगे ( सर ) जुड़ जाता है और तेनजिंग नोर्गे को भी उसी साल उनके देश नेपाल द्वारा ऑर्डर ऑफ़ द स्टार ऑफ़ नेपाल (प्रथम श्रेणी) का अवॉर्ड मिला था।
एडमंड हिलेरी अवार्ड्स :
- नाइट बैचलर 12 जून 1953
- ऑर्डर ऑफ़ द ब्रिटिश एम्पायर – KBE — ब्रिटिश 1953
- क्वीन एलिज़ाबेथ द्वितीय राज्याभिषेक पदक 6 जून 1953
- रॉयल जियोग्राफिकल सोसाइटी गोल्ड मेडल 1958
- पोलर मेडल 1958
- ऑर्डर ऑफ़ न्यूज़ीलैंड (ONZ) 1987
- ऑर्डर ऑफ़ द गार्टर (KG) ब्रिटेन 1995
- पद्म विभूषण 2008
तेनजिंग नोर्गे अवार्ड्स :
- ऑर्डर ऑफ़ द स्टार ऑफ़ नेपाल (प्रथम श्रेणी) 1953
- जॉर्ज मेडल ” 2 जुलाई 1953
- क्वीन एलिज़ाबेथ द्वितीय राज्याभिषेक पदक 1953
- हबर्ड नेशनल ज्योग्राफिक सोसाइटी मेडल ” अमेरिका 1953
- ऑर्डर ऑफ़ नेपाल तारा 1953
- पद्म भूषण ” 1959
ऐसे ही कई अवार्ड्स एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे को मिले है
एडमंड हिलेरी
एडमंड हिलेरी का जन्म 20 जुलाई 1919 ऑकलैंड सिटी’ न्यूजीलैंड में हुआ था। पिता’ पर्सिवल ऑगस्टस हिलेरी माता’ गर्टूड हिलेरी
एडमंड हिलेरी की पहली शादी 1953 में लुईस मैरी रोज के साथ हुई थी पीटर हिलेरी ‘ सारा हिलेरी ‘ बेलिंडा हिलेरी इनके तीन बच्चे थे लेकिन 31 मई 1975 प्लेन हादसे में इनकी पत्नी और बेटी बेलिंडा की मृत्यु हो गई थी।
एडमंड हिलेरी की दूसरी शादी 1989 ‘जून मलग्रू’ के साथ हुई।
एडमंड हिलेरी को 11 जनवरी 2008 में हार्ट अटैक आने से ऑकलैंड सिटी हॉस्पिटल, न्यूजीलैंड में मृत्यु हो गई थी
तेनजिंग नोर्गे
तेनजिंग नोर्गे का जन्म 29 मई 1914 नेपाल के खुम्बू क्षेत्र में हुआ था पिता’ घंग ला मिंगमा माता’ डोक्मो किंजोम
तेनजिंग नोर्गे की पहली शादी 1935 ‘दावा फूटी शेरपा’ के साथ हुई थी उस समय बच्चे ‘नीमा दोर्जे नोर्गे’ ‘पेम पेम नोर्गे’ ‘नीमा नोर्गे’ थे लेकिन 1944 में पहली पत्नी की मृत्यु हो गई थी।
उसके बार 1945 ‘आंग ल्हामू शेरपा’ के साथ उनकी दूसरी शादी हुई थी। फिर 17 साल बार तेनजिंग नोर्गे ने 1962 में तीसरी शादी करी ‘डाकू नोर्गे’ के साथ इस पत्नी के चार बच्चे हुए। जैमलिंग तेनजिंग नोर्गे, नोरबू तेनजिंग नोर्गे, डेकी तेनजिंग नोर्गे, धामे तेनजिंग नोर्गे,
9 मई सन् 1986 में तेनजिंग नोर्गे की ब्रेन हैमरेज के कारण उनकी मृत्यु हो गई थी
एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे स्टेच्यू!
एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे के कई देश और कई जगहों पर इनके स्टेच्यू बने है
सर एडमंड हिलेरी:– न्यूजीलैंड’ में द हर्मिटेज होटल, माउंट कुक विलेज, के सामने सर एडमंड हिलेरी की मूर्ति 2.3 मीटर (7.5 फिट ) ऊंची बनी है जिसके शिल्पकार ‘ब्रायन एम. जोन्स’ है 50वीं वर्षपूर्ति के अवसर पर बनाई गई थी। 5 जुलाई 2003 को सर एडमंड हिलेरी ने स्वयं किया था

इस स्टेच्यू में सर एडमंड हिलेरी पर्वत को ध्यानपूर्वक देखते हुए दिखाई दे रहे है
तेनजिंग नोर्गे :- भारत के दार्जिलिंग ‘हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट’ में तेनजिंग नोर्गे का स्टेच्यू बना है जिसमें उन्होंने सीधे हाथ में रॉक हैमर हवा में उड़ा रखा है जब माउंट एवरेस्ट पर्वत की चोटी पर तेनजिंग नोर्गे प्रथम पहुंचे थे तब उन्होंने ऐसे ही एक पॉज देकर फोटो खिचवाई थी।
नेपाल के सोलुखुम्बु जिले में एक एयरपोर्ट जिसका नाम लुक्ला एयरपोर्ट था सन् 2008 में इसका नाम बदलकर तेनजिंग-हिलेरी एयरपोर्ट के नाम से रख दिया गया। उसके बाद 2023 में एयरपोर्ट पर एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे का स्टेच्यू बनाया गया।
