पैंगोलिन जानवर
पैंगोलिन जानवर की आयु लगभग 15 से 23 साल तक रहती है यह इनके प्राकृतिक आवास (जंगल) की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कई पैंगोलिन इससे भी अधिक वर्ष तक जीवित रहते है

पैंगोलिन 8 प्रजातियां!
पैंगोलिन स्तनधारी जानवर होता है पूरे विश्व में इनकी आठ प्रजातियां पाई जाती है इनके पूरे शरीर पर कठोर केराटिन के शल्क होते है
➜ अफ्रीका पैंगोलिन
- जायंट ग्राउंड पैंगोलिन
- टेम्मिंक ग्राउंड पैंगोलिन
- व्हाइट – बेलीड पैंगोलिन
- ब्लैक – बेलीड पैंगोलिन
➜ एशिया पैंगोलिन
- चीनी पैंगोलिन
- सुंडा पैंगोलिन
- भारतीय पैंगोलिन
- फिलीपीन पैंगोलिन
इनमें विशालकाय “जायंट ग्राउड पैंगोलिन” प्रजाति में पाए जाते है
पैंगोलिन
पैंगोलिन स्तनधारी जानवर होता है जो अफ्रीका और एशिया के जंगल के झाड़ीदार क्षेत्रों और घास में मैदान में पाए जाते है। अधिकतम प्रजातियां जमीन के नीचे सुरंग बनाकर रहती है और कुछ प्रजातियां जैसे ब्लैक – बेलीड पेड़ो में बनी सुरंगों में रहते है पैंगोलिग रात के समय अधिक सक्रिय होते है यह मुख्य तौर पर चींटियाँ और दीमक खाते है
पैंगोलिन पर कई जानवर हमला करते है लेकिन पैंगोलिन अपने आप को गेंद की तरह मोड़ लेता है इनके शरीर के ऊपर बने कठोर शल्क इनकी रक्षा करते है जिसके कारण कोई भी जानवर इनका शिकार नहीं कर पाता।
पैंगोलिन जानवर का शरीर
पैंगोलिन के चार पैर होते है हर पैर में पांच उंगलिया होती है सभी उंगलियों पर एक इंच लम्बे नुकीले नाखून रहते है अपने आगे वाले दोनों पैरों से सुरंग बनाना दीमक और चींटियों के मिट्टी वाले घरो को नष्ट करने के लिए इस्तमाल करते है

पैंगोलिन जानवर की 8 प्रजातियां पाई जाती है जिनके शरीर का रूप एक जैसा नहीं होता उनमें आकार, रंग, शल्क (स्केल), पूँछ और थूथन में कुछ अंतर होता है।
सभी प्रजातियों के अनुसार” पैंगोलिन का मुँह 5 से 10 सेंटीमीटर लम्बा होता है
हर प्रजातियों में 5 से 40 किलोग्राम के बीच इन सभी का वजन होता है इनकी लंबाई थूथन से पूछ तक लगभग 30 सेंटीमीटर से 140 सेंटीमीटर रहती है
पैंगोलिन जानवर के दांत नहीं है इनकी लम्बी चिपचिपी जीभ होती है 20 सेंटीमीटर से 40 सेंटीमीटर ” कई पैंगोलिन जानवर में जीभ उनके शरीर से भी बड़ी पाई जाती है जीभ से चीटियाँ और दीमक निगल लेते है
जब पैंगोलिन चींटियां या दीमक निगलते है तब उसी समय इनके पेट में छोटे कड़ चले जाते है जो भोजन को पचाने में मदद करते है
इनके पूरे शरीर पर केराटिन से बने कठोर शल्क होते हैं पेट और छाती को छोड़कर” सभी प्रजातियों में शल्क की संख्या लगभग 500 से 1000 के बीच में पाई जाती है
केराटिन नामक पदार्थ कई जगह पाए जाते है ” मनुष्य के बाल और नाखून ” गैंडे का सींग ” मुर्गे और अन्य पक्षियों की चोंच ‘और पंजे में केराटिन पाए जाते है
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असुरक्षित स्थिति:
पैंगोलिन दुनिया का सबसे अधिक अवैध रूप से तस्करी किए जाने वाला जानवर है इनकी सभी प्रजातियों पर संकटग्रस्त बना रहता है।
पैंगोलिन के शल्क चीनी चिकित्सा में उपयोग किए जाते हैं इनके शल्क को पीसकर कई दवाइयां बनाई जाती है और उनके मांस से लेदर के जूते ” बैग ” कपड़े इत्यादि बनाकर महंगे बेचे जाते हैं कई देश में इनके मांस को महंगा व्यंजन माना जाता है
सिर्फ 2019 में लगभग 1,90,000 पैंगोलिन जानवर की अवैध तस्करी करी गई।
( आईयूसीएन ) के तहत पैंगोलिन की सभी प्रजातियां संकटग्रस्त बताई गई है
पैंगोलिन में मातृत्व देखभाल
पैंगोलिन जानवर में मादा और नर आमतौर पर दो से चार वर्ष की उम्र में प्रजनन (संभोग) करने योग्य हो जाते हैं
पैंगोलिन की सभी प्रजातियों में मादा के गर्भवती होने के बाद बच्चे के जन्म का समय निश्चित नहीं होता। एशिया पैंगोलिन मादा गर्भवती होने पर 2 से 4 महीने के बीच में बच्चे को जन्म देती है और अफ्रीका पैंगोलिन मादा 3 से 7 महीने के बीच में बच्चे को जन्म देती है
पैंगोलिन मादा आमतौर पर एक साल में एक ही बच्चे को जन्म देती है कुछ मामलों में दो बच्चे को जन्म दे सकती है
बच्चे के जन्म के समय उसका शरीर बेहद नाजुक, मुलायम और कोमल होता है। 2 – 3 दिन बाद इनके शल्क कठोर होने लगते है 3 हफ्ते 2 महीने के बीच में ही शल्क पूरी तरह ठोस हो जाते है
बच्चा लगभग तीन से चार महीने तक अपनी मां की पूछ पर सवारी करता है
मादा 2 साल तक लगभग अपने बच्चे का देखभाल करती है
पैंगोलिन जानवर का बच्चा तीन से चार महीने अपनी मां का दूध पीता है उसके बाद दीमक और चीटियां खाना शुरू करता है
पूरे जीवन भर में पैंगोलिन मादा 5 से 12 बच्चों को जन्म देती है
निष्कर्ष :- मध्य अफ्रीका के जंगल में विशालकाय पैंगोलिन मिला था जायंट ग्राउड” प्रजाति का जिसकी लंबाई लगभग 2 मीटर ( 6.6 फीट) बताई जा रही थी।
180 से ज्यादा देशों की सरकार ने कानून लागू किया है जिसमें पैंगोलिन जानवर की अवैध तस्करी करने वाले दोषियों को सख्त सजा के साथ जेल भेजा जाएगा। हर देश में सजा अलग – अलग है