ऐसी बीमारियां जिनका पूरी तरह से इलाज संभव नहीं है Diseases with no cure ! यह बीमारी जीवनभर बनी रह सकती है।” फूल आर्टिकल easy guide
इंसानों के शरीर में कई सारी बीमारियां उत्पन्न हो सकती है कुछ बीमारियां ऐसी होती है जिनको कम समय में ठीक कर सकते है दवाई खा कर और कुछ बीमारियां ऐसी होती है जिनको कुछ वक़्त लगता है ठीक होने में दवाई खा कर या ऑपरेशन कराकर किंतु वह पूरी तरह ठीक भी हो जाती है लेकिन कुछ ऐसी बीमारियां होती है जिनको पूरी तरह से खतम नहीं किया जा सकता। सिर्फ दवाई से कुछ हद तक आराम दिया जा सकता है
ऐसी कई बीमारियां होती है जो एक बार किसी इंसान को हो जाने पर उस इंसान को जीवन भर तक रहती है इस आर्टिकल में जानेंगे ऐसी कौनसी बीमारी होती है इंसानों को ” जिसको पूरी तरह खतम नहीं किया जा सकता। ऐसी बीमारियां जिनका पूरी तरह से इलाज संभव नहीं है
ऐसी बीमारियां जिनका पूरी तरह से इलाज संभव नहीं है
- रूमेटाइड आर्थराइटिस
- टाइप 1 डायबिटीज
- अस्थमा
- पार्किसन
- सिस्टिक फाइब्रोसिस
- ल्यूपस
- मल्टीपल स्कलेरोसिस
- अल्जाइमर
- हेपेटाइटिस बी
- डाउन सिंड्रोम
- सिकल सेल एनीमिया
- क्रोहन रोग
- टाइप 2 डायबिटीज
- क्रोनिक किडनी डिजीज
- हार्ट फेलियर
- एएलएस ( ALS )
- क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़ (COPD)
- अल्सरेटिव कोलाइटिस
- हर्पीज़
- एचआईवी
- एचपीवी
- हाई ब्लड प्रेशर
रूमेटाइड आर्थराइटिस :- ऑटोइम्यून बीमारी है इसके लक्षण ” जोड़ों में अधिक दर्द सूजन हो जाना। हाथ ” पैर ” उंगलियों में दर्द होना। हर समय कमजोरी थकान महसूस होना।
इस बीमारी का सही समय पर इलाज कराना उचित होता है अन्यथा यह बीमारी बढ़ सकती है
इस बीमारी को जड़ से खतम नहीं किया जा सकता सिर्फ दवाई खा कर कंट्रोल किया जा सकता है
टाइप 1 डायबिटीज :- यह भी ऑटोइम्यून बीमारी है
जब शरीर की सुरक्षा करने वाली प्रणाली ( इम्यून सिस्टम ) इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को दुश्मन समझकर नष्ट करने लगती है तब यह बिमारी उत्पन्न होने लग जाती है
यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है इस बीमारी के मुख्य लक्षण ” बार – बार पेशाब आना ” अधिक प्यास लगना ” वजन कम हो जाना ” बार – बार भूख लगना ” धुंधला दिखाई देना।
अस्थमा :- एक ऐसी बीमारी है जो कई लोगों में देखने को मिलती है और यह सामान्य बीमारी मानी जाती है
अस्थमा बीमारी के लक्षण ” सांस लेने में दिक्कत ” सीने में दर्द होना ” सांस लेते समय घुटन महसूस होना ” सीने के अंदर से हल्की सी आवाज सी आना ( सीटी या गड़गड़ाहट ) जैसा
पार्किसन :- यह बीमारी ज्यादातर 60 से अधिक उम्र वाले लोगों में पाई जाती है पार्किंसन डिजीज एक ब्रेन कंडीशन है जिसके कारण शरीर के मसल्स कंट्रोल बैलेंस का मूवमेंट कंट्रोल नहीं हो पाते। पार्किंसन के बीमारी बॉडी के सेंस सोचने की क्षमता मेंटल हेल्थ पर बुरा असर डालती है
पार्किसन रोग के लक्षण ” व्यक्ति के हाथ पैर कांपना ” चलने में परेशानी ” मास पेशियों का जकड़ जाना ” डिप्रेशन ” सोने में दिक्कत ” सूंघने की क्षमता कम हो जाना
ल्यूपस :- ऑटोइम्यून बीमारी है ल्यूपस बीमारी अधिकतम महिलाओं में देखने को मिलती है
लक्षण :- बुखार ” जोड़ो में दर्द सूजन ” बालों का झड़ना ” मुंह में छाले हो जाना ” चेहरे पर लाल चकत्ते हो जाना धूप में निकलते समय और चकत्ते का बढ़ जाना ” यह बीमारी हार्ट ” किटनी ” लिवर ” फेफड़ों को भी प्रभावित करती है
मल्टीपल स्क्लेरोसिस :- ऑटोइम्यून बीमारी। जब शरीर की प्रतिरक्षा तंत्र मस्तिष्क और रीढ़ की नसों की सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचाता है तब यह बीमारी उत्पन्न होने लगती है
इस बीमारी के लक्षण:- शरीर के किसी भी हिस्से में कमजोरी होना ” मांसपेशियों में जकड़न ” एक या दोनों आंखों से देखते समय धुंधला दिखाई देना ” आंखों में दर्द रहना ” अधिक थकान महसूस होना ” हाथ , पैर या चेहरे में सुन्नपन या झुनझुनी जैसा होना ‘ बार – बार चक्कर आना।
अल्जाइमर :- मस्तिष्क को प्रभावित करने वाली बीमारी होती है जो 60 उम्र से ज्यादा वाले बुजर्गो में अधिक पाई जाती है
लक्षण ” याददाश्त कमजोर होना ” चिड़चिड़ा पन ” समय – समय पर भूल जाना ” बोलने में असमर्थ “
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ऐसी बीमारियां जिनका पूरी तरह से इलाज संभव नहीं है :-
क्रोहन रोग :- आज के समय यह बीमारी कई लोगों को हो रही है। यह बीमारी मुख्य रूप से आंत में होती है किसी भी उम्र में हो सकती है इस बीमारी के लक्षण ” पेट में दर्द होना ” बार-बार लूज मोशन होना ” मुंह में छाले होना ” वजन घटना ” थकान महसूस होना ” मल के साथ खून भी आना “
क्रोनिक किडनी डिजीज :- यह किडनी की अंदरूनी बीमारी होती है इस बीमारी में किडनी समय के साथ-साथ डैमेज होने लगती है अगर सही समय पर इलाज नहीं कराया गया। तो किडनी को बहुत भारी नुकसान हो सकता है
यह बीमारी तब शुरू होती है जब किडनी ठीक से खून को साफ ना कर पाए। तब शरीर में गंदे पदार्थ और अतिरिक्त पानी जमा होने लगता है जिससे यह बीमारी उत्पन्न होने लग जाती है
इस बीमारी के लक्षण:- ” चेहरे या पैरों पर सूजन आ जाना ” स्किन पर खुजली होना ” पेशाब करते समय जलन या दर्द होना ” पानी ना पीने पर भी बार – बार पेशाब जाना ” भूख कम लगना ” मुंह का स्वाद बदल जाना ” ठीक से नींद नहीं आना ” किसी कम में ध्यान ना लगा पाना।
हार्ट फेलियर :- इस बीमारी में दिल की पंप करने की क्षमता कम हो जाती है जिसके कारण शरीर के हर हिस्से में ठीक से ब्लड नहीं पहुंच पाता। शरीर में तरल अतिरिक्त पानी जमा होने लगता है जिससे शरीर में सूजन और सांस फूलने की समस्या होने लग जाती है
हार्ट फेलियर बीमारी के लक्षण:- ” थोड़ी दूर चलने पर सांस फूलना ” सीने में बार – बार दर्द होना ” पैर में सूजन ” थकान महसूस होना ” लगातार खांसी आते रहना “
ऐसी बीमारियां जिनका पूरी तरह से इलाज संभव नहीं है Continue Reading…
एएलएस ( ALS ) :- पूरा नाम एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस है यह ऐसी बीमारी है ” मस्तिष्क और रीड की हड्डी की तंत्रिका कोशिकाओं ( मोटर नर्व सेल्स ) को नुकसान पहुंचती है जो मांसपेशियों को गतिविधियों को नियंत्रित करती है जिसके कारण मांसपेशिया कमजोर और सिकुड़ने लगती हैं
लक्षण ” खाना निगलने में कठिनाई ” हाथ पैर और गर्दन की मांसपेशियों में कमजोरी ” चलने और दौड़ने में कठिनाई ” मांसपेशियों में जकड़न ”
क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़ (COPD) :- यह बीमारी फेफड़ों में होती है फेफड़ों में अधिक धुआं जाने से यह बीमारी विकसित होती है ज्यादा धूम्रपान करना ” लकड़ी जलने का धुआं फेफड़ों में जाना ” नुकसान दायक होता है जिसकी वजा से बीमारी होती है
इस बीमारी के क्या – क्या लक्षण होते है ” सांस फूलना ” खांसी आते समय सीने में दर्द होना ” बार-बार बलगम आना ” सीने में जकड़न ”
अल्सरेटिव कोलाइटिस :- हमारे शरीर की इम्यून सिस्टम गलती से खाना पचाने वाले अच्छे बैक्टीरिया को दुश्मन समझ लेता है और उन पर हमला करने के चक्कर में आंतों को नुकसान पहुंचा देता है जिसके कारण आंतों में सूजन हो जाना छाले पढ़ जाना’ समस्या हो जाती है
लक्षण :- पेट में दर्द होना ” दस्त होना ” बार – बार शौच जाना ” मल में खून आना ” शौच करते समय मल के रास्ते दर्द होना ” पेट में ऐंठन ” वजन कम होना ” गैस बनना
हाई ब्लड प्रेशर :- ऐसी बीमारी है कई लोगों में होने के बाद भी तुरंत लक्षण नहीं दिखाई देते।
हाई ब्लड प्रेशर बीमारी होती कैसे है :- किटनी या हार्मोन से जुड़ी कुछ बीमारी पहले से हो ” परिवार ” शराब धूम्रपान का अधिक सेवन ” नियमित व्यायाम न करना ” मोटापा ” अधिक नमक का सेवन
लक्षण :- दिल की धड़कन तेज होना ” सांस फूलना ” सर दर्द करना ” धुंधला दिखाई देना ” चक्कर आना
ऐसी बीमारियां जिनका पूरी तरह से इलाज संभव नहीं है ( कीटाणु ” वायरस वाली )
हर्पीज़ :- एक ऐसी बीमारी है जो कई लोगों में पाई जाती है इस बीमारी में लाल कलर के पानी के बूंदों की तरह शरीर के स्किन पर होने लग जाते है शरीर के किसी भी जगह पर हो सकते है ज्यादातर पेट ” कमर ” छाती ” और मुंह पर देखने को मिलता है यह बीमारी एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलती है

हर्पीज़ बीमारी के दो मुख्य वायरस होते है जिनका पूरा नाम ‘ हर्पीज़ सिम्प्लेक्स वायरस 1 ( HSV1 ) और हर्पीज़ सिम्प्लेक्स वायरस 2 ( HSV2 ) किसी इंसान के शरीर में अगर इन दोनों में से एक भी वायरस चला जाता है तो उस इंसान के शरीर में लाइफटाइम तक रह सकता है
HSV-1 और HSV-2 दोनों हर्पीज़ सिंप्लेक्स वायरस के प्रकार हैं। दोनों वायरस लगभग एक जैसे होते हैं और शरीर में समान प्रकार का संक्रमण कर सकते हैं। मुख्य अंतर केवल इतना है कि HSV-1 अधिकतर मुंह और होंठों के आसपास संक्रमण करता है, जबकि HSV-2 अधिकतर जननांग (genital) क्षेत्र में संक्रमण करता है। हालांकि, दोनों वायरस दोनों जगह संक्रमण करने में सक्षम हैं।
सही दवाई और खान-पान से हर्पीज़ बीमारी को खतम कर दिया जाता है अर्थात यह वायरस शरीर के नसों में जाकर सो जाता है लेकिन वायरस दुबारा से सक्रिय हो सकते है मुख्य कारण :- धूप ” स्ट्रेस ” बुखार ” कुछ खाने से एलर्जी ” दवाइयों से ” हार्मोनों में बदलाव ” दवाई ” इनसे दुबारा सक्रिय हो सकते है
शरीर के जिस जगह हर्पीज़ बीमारी के दाने होते है उसमें जलन खुजली दर्द होता है
हर्पीज़ बीमारी एक इंसान से दूसरे इंसान में कैसे फैलती है ” किस करना ” यौन संपर्क ” झूटा खाना ”
एचआईवी :- HIV जिसको कुछ लोग AIDS भी कहते है एचआईवी एक वायरस होता है जिसका पूरा नाम ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस है यह बीमारी एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलती है किस करना ” यौन संपर्क ” झूटा खाना ” इसके कारण से फैलती है
किसी इंसान को अगर HIV हो जाती है और उस इंसान ने सही समय पर इलाज करवाना शुरू नहीं किया। तब उस इंसान को AIDS की बीमारी भी हो सकती है
HIV के लक्षण :- सिरदर्द ” बुखार ” स्किन पर दाने ” रात में पसीना आना ” गले में खराश ”
AIDS के लक्षण :- बहुत अधिक वजन कम हो जाना ” लंबे समय तक बुखार रहना ” लगातार दस्त ” खाँसी बार – बार आना “
ऐसी कुछ और अन्य बीमारी जिनका 100% इलाज नहीं है:-
- सिस्टिक फाइब्रोसिस
- हेपेटाइटिस बी
- डाउन सिंड्रोम
- सिकल सेल एनीमिया
- एचपीवी
- टाइप 2 डायबिटीज
किसी भी इंसान में इनमें से कोई एक भी बीमारी हो जाती है या होने लगती है तब उस व्यक्ति को उसी क्षण इलाज कराना जरूरी होता है अन्यथा बीमारी बढ़ सकती है
यह सब ऐसी बीमारी है जो एक बार किसी इंसान को हो जाने पर इन बीमारियों को हंड्रेड परसेंट पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता। सिर्फ कंट्रोल किया जा सकता है दवाइयों से लाइफस्टाइल ” खानपान से जो व्यक्ति पर निर्भर करता है
निष्कर्ष :- इनमें से कुछ बीमारी आनुवंशिक होती है माता या पिता इनमें से एक में भी व्यक्ति को अगर बीमारी होती है बच्चे में बीमारी आने के संभावना हो सकते हैं लेकिन निश्चित नहीं होता। ” लगत खान – पान उम्र के साथ शरीर का कमजोर होना या किसी दूसरी बीमारी की वजह से यह बीमारियां होने की संभावना होती है|| हर्पीस ” एचआईवी “ एचपीवी यह तीन बीमारी किसी दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आने में होती है
Description :- स्पष्ट सूचना:
हमने आपको जिन बीमारियों या उनके लक्षणों के बारे में जानकारी दी है, वह केवल बेसिक (प्रारंभिक) जानकारी है, जिसे कुछ मुख्य बिंदुओं के माध्यम से समझाने का प्रयास किया गया है। यह जानकारी पूरी या अंतिम चिकित्सीय सलाह नहीं है। जानकारी लिखते समय हमसे अनजाने में कोई त्रुटि, टाइपिंग की गलती या कोई जानकारी छूट भी सकती है। इसलिए किसी भी बीमारी के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालने या उपचार शुरू करने से पहले विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करें और आवश्यकता होने पर योग्य डॉक्टर से सलाह लें।
ऐसी बीमारियां जिनका पूरी तरह से इलाज संभव नहीं है आर्टिकल ..समाप्त…….
